
आज तक बारिश को गिरते हुए क़यी बार देखा था ।
पर आज पहली बार हर एक बूँद की आवाज़ सुनने का मौक़ा मिला ।
बंद खिड़की देख कर आज मुझे अफ़सोस हुआ
क्यू हमने इतने अहम पलों को खो दिया?
वो पेड़ के हरे पत्ते देख आज मुझे ख़ुशी का मतलब पता चला
क्योंकि, बारिश की बूँद और एक पत्ते का रिश्ता बनते मैने आज देखा।
वह लहराती हुई हवा जैसे उन पत्तों से बात कर रही थी
और वह बारिश की बूँदे पत्तों का साथ दे रही थी ।
आज तक बारिश को गिरते हुए क़यी बार देखा था ।
पर आज घरके अंदर होते हुए भी उसे महसूस करने का मौक़ा मिला।
उस बारिश में मुझे भीगना था, घर के बाहर निकलना था।
और एक छाता लिए पैदल अँजान रास्ते पर से गुजरना था।
कुछ ख़ास ढूँढना नहीं था, किसीसे मिलना नहीं था, या कुछ ख़रीदनानहीं था
पर इस lockdown वाली ज़िन्दगी से कुछ पल चुराकर बस बारिश में जी भर के भीगना था।
पर आज हम फँस गए हैं इन चार दीवारों के बीच,
जैसे कुछ महीनो पहले हमने उस उड़ते हुए पंछी को बंद कर रखा था।
पर क्या करें? ये सब काम हमहीने तो किए है।
पर मैं अभी भी सोचती हूँ क्या इंसानियत नाम का कोई खेल था?
आज तक बारिश को गिरते हुए क़यी बार देखा था ।
पर आज बारिश ने बोहत सोचने पर मजबूर कर दिया।
-Kalyani l.
